June 27, 2022

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हिंदी कें अनिवार्य विषय बनेबाक पूर्वोत्तर राज्य मे किए भ’ रहल अछि विरोध?

• दिलीप कुमार शर्मा

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हिंदी कें ‘भारतक भाषा’ बतबैत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कहने छलाह जे पूर्वोत्तर केर सभ आठ राज्य मे कक्षा दसम धरिक स्कूल मे हिंदी कें अनिवार्य करबा पर सहमति जताएल गेल अछि। अमित शाह संसदीय राजभाषा समितिक अध्यक्ष सेहो छथि। ओ कहने छलाह जे पूर्वोत्तर केर आठो राज्य मे हिंदी पढ़ेबाक लेल 22 हजार शिक्षक बहाल कयल गेल अछि।अमित शाह इहो कहने छलाह जे पूर्वोत्तर केर नौ आदिवासी समुदाय अपन बताया लीक लिपि कें बदलि क’ देवनागरी क’ लेने अछि।

पिछला किछु वर्ष मे भाजपा पूर्वोत्तर मे जेहन तरहक राजनीति कयलक अछि, ओकरा देखैत हालक घोषणा सँ कतेको लोक कें संदेह होम’ लागल अछि। संदेह ई अछि जे ‘हिंदी-हिंदू-हिंदुस्तान’ फार्मूला अंतर्गत पूर्वोत्तर केर स्कूल सभ मे हिंदी कें अनिवार्य विषय बनेबाक प्रयास कयल जा रहल अछि। एकरा ल’ एहन प्रतिक्रिया सभ सोझाँ आबि रहल अछि जे भारत कें एकटा एहन देश बनेबाक प्रयास कयल जा रहल अछि, जत’ एक संस्कृति, एक भाषा आ एक धर्म रहत। चर्चा इहो अछि जे स्कूल मे हिंदी कें अनिवार्य कयला सँ एतुका स्कूलक बच्चा सभ पर बोझ पड़त। किएक त’ हिंदूक जकर भाषा नहि छै, ओकरा लेल हिंदी सीखब बहुत कठिन हैत।

नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन केर अध्यक्ष सैमुअल बी जिरवा अपन विरोध जतबैत बीबीसी सँ कहलनि जे हिंदी कें अनिवार्य कयला सँ हमर अपन मातृभाषा लुप्त भ’ जाएत, किएक त’ हिंदी हमर मातृभाषा नहि अछि। मेघालय आ पूर्वोत्तर केर अन्य राज्य मे हिंदी एकटा वैकल्पिक विषय अछि। समरा सभ कें हिंदी कें वैकल्पिक विषयक रूप मे रखबा पर कोनो आपत्ति नहि अछि। एतुका छात्र-छात्रा पर जबरदश्ती हिंदी थोपबाक बात कोनो तरहें हमरा सभ कें मंजूर नहि अछि।

ओना एहि विषय मे लोकक आक्रोश त’ देखबा मे आबि रहल अछि मुदा लोक सभ अखन विरोध प्रदर्शनक मोन नहि बना रहल छथि। एहि संबंध मे सैमुअल कहैत छथि जे अखन सम सभ एहि संबंध मे कोनो तरहक विरोध प्रदर्शन.केर गप नहै सोचलहुँ अछि। एहि संबंध मे गृहमंत्री कें ज्ञापन सौंपल गेल अछि। पूर्वोत्तर केर आठ प्रमुख छात्र संगठन सभ मीलि क’ गृहमंत्रीक एहि प्रस्ताव पर अपन विचार व्यक्त कयलहुँ अछि। भारत सरकार कें ई बुझ’ पड़तैक जे भारत एक सजातीय राज्य नहि अछि। पूर्वोत्तर मे हिंदी कोनहु राज्यक मातृभाषा नहि अछि। हमरा ओत’ स्थानीय भाषाक अतिरिक्त अंग्रेजी शिक्षा एक पसंदक माध्यम अछि।

मेघालय केर पूर्व मंत्री माजल अम्परिन लिंगदोह पूर्वोत्तर राज्य मे हिंदी कें अनिवार्य विषय बनेबा कें ल’ क’ केंद्र सरकारक आलोचना करैत कहलनि जे गृहमंत्री पूर्वोत्तर राज्य मे हिऔदी कें अनिवार्य विषय बनेबाक जे प्रस्ताव रखलनि अछि, ओकरा ल’ क’ भ्रमक स्थिति उत्पन्न भ’ गेल अछि। ओ प्रशन ठाढ़ करैत कहलनि जे ओ कोन तरहें हिंदी कें अनिवार्य विषय बनेबाक योजना बना रहल छथि। ओ कहलनि जे मेघालय मे आठम कक्षा धरि हिंदी तेसर भाषाक रूप मे ओहिना अनिवार्य अछि।जँ एकर उद्देश्य हमर स्थानीय भाषा सभ कें हटा क’ हिंदी कें अनिवार्य करबाक अछि त’ ई कोनो तरहें स्वीकार्य नहि हैत। मेघालय मे कतेको साल सँ हिंदी शिक्षकक समूह काज अ’ रहल अछि। मेघालय सरकार बच्चा सभ कें कतेको साल सँ हिंदी पढ़ा रहल अछि। जँ एकर बादो भारत सरकार दिस सँ किछु करबाक गप्प कहल जा रहल अछि त’ एहि सँ डर उत्पन्न होइत अछि। हमरा ओत’ दसम, बारहम मे हिंदी कें अनिवार्य क’ देल जाएत त’ हमर मातृभाषाक की हैत? भारत सरकारक फरमान लागू भेल त’ खासी आ गारो भाषाक की हैत जे एतुका प्रमुख भाषा अछि।

प्रदेशक शिक्षामंत्री रहि चुकल आ वर्तमान विधायक अम्परिन कहैत छथि – हम नहि चाहैत छी जे एहि देश मे भाषा धर्मक नाम पर कोनहु विभाजन हो। जँ हमर द या पुता समर भाषा नहि पढ़ि पाबि रहल अछि त’ ई बहुत खतरनाक हैत। हमर भाषा प्राय: समाप्त भ’ जाएत। हम हिंदीक विरुद्ध नहि छी। हम अपन शिक्षा दिल्ली सँ प्राप्त कयने छी आ हम ठीक – ठाक हिंदी बाजि लैत छी। हमर तीन गोट धिया पुता हिंदी आ संस्कृत लिखब – बाजब जनैत अछि। एय’ धरि जे मेघालय केर ग्रामीण क्षेत्र मे युवा सेहो हिंदी गीत सुनैत छथि। मुदा हमर मातृभाषा कें हटा क’ ओकर स्थान पर हिंदी कें अनिवार्य करब स्वीकार्य नहि हैत।

पूर्वोत्तर मे भाषा सँ जुड़ल मुदा सदिखन संवेदनशील रहल अछि।

मेघालय मे द वॉइस ऑफ द पीपुल पार्टीक अध्यक्ष अरडेंट मिलर बसियावमोइट आरोप लगबैत छथि जे केंद्रक सत्ता सम्हारि रहल भाजपा एहि तरहक परिवर्तन क’ भारत कें एकटा हिंदू राष्ट्र मे परिवर्तित करबाक प्रयास मे जुटल अछि। पूर्व विधायक बसियावमोइट एहि मुद्दा पर मीडिया सँ कहलनि जे केंद्रीय गृहमंत्री केर निर्देश पर मेघालय समेत पूर्वोत्तर केर राज्य दसम कक्षा धरिक स्कूल मे हिंदी अनिवार्य करबा पर सहमति जतौलनि अछि। मुदा ई भाजपाक नेतृत्व बला एनडीए सरकार द्वारा भारत कें एकटा एहन देश मे बदलबाक प्रयास अछि जत’ एक संस्कृति, एक धर्म आ एक भाषा रहत।

असल मे असम सँ टूटि क’ मेघालय केर राज्य बनबाक पाछू सेहो भाषा एकटा पैघ कारण छल। मेघालय केर लोक असमिया भाषाक स्थान पर अपन भाषा कें प्रमुखता देबाक मांग उठौने छल।

एकर अतिरिक्त असम केर बराक घाटी मे बंगाली भाषा आंदोलन सेहो असम सरकार द्वारा असमिया कें राज्यक एकमात्र आधिकारिक भाषा बनेबाक फैसलाक विरुद्ध छल। ओहि क्रम मे भाषा सँ जुड़ल विरोधक मुख्य घटना  19 मई, 1961 कें सिलचर रेलवे स्टेशन पर भेल छल, जाहि मे 11 बंगालीक मृत्यु भेल छल।

असम केर वरिष्ठ पत्रकार बैकुंठ नाथ गोस्वामी कहैत छथि जे जँ कोइ अपन आवश्यकताक लेल हिंदी वा अन्य कोनो भाषा सीखैत छथि त’ एहि मे ककरो कोनो आपत्ति नहि अछि। एत’ स्कूल षभ मे हिंदी सालो सँ एकटा वैकल्पिक भाषाक रूप मे पढ़ाएल जा रहल अछि। मुदा केंद्र सरकार जाहि तरहें हिंदी कें एतुका लोक पर थोपबाक काज क’ रहल अछि, ओहि मे हिंदी-हिंदू-हिंदुस्तान बला फार्मूलाक पहिल झलक देखाय पड़ि रहल अछि।

एकर एकटा पैघ कारण ई अछि जे पूर्वोत्तर केऋ अधिकांश राज्य मे भाजपाक सरकार अछि। एहन कतेको प्रश्न सोझाँ अबैत अछि जे आखिर की कारण अछि जे भाजपा एहि समय हिंदी कें एत’ जबरदश्ती थोपबाक काज क’ रहल अछि।

ओ दावा करैत छथि जे कोनो ने कोनो मुद्दा सँ असम केर वातावरण गरमाएल रहय। किएक त’ पार्टीक चुनावी घोषणापत्र मे जे वादा कयल गेल छल, ओकर अनुसार काज नहि भेल। महगी-बेरोजगारी सनक मुद्दा पर लैक प्रश्न पूछ’ लागल छथि। तें प्रमुख प्रश्न कें अनठिया देबा लेल भाषाक मुद्दा कें उठाएल गेल अछि।

असम केर सर्वोच्च साहित्यिक संगठन असम साहित्य सभा सेहो केंद्र सरकारक एहि प्रस्तावक विरोध करैत बयान जारी कयलक अछि – केंद्रीय गृहमंत्री कें हिंदी थोपबाक बदला असमिया आ अन्य स्वदेशी भाषाक विकास लेग डेग उठेबाक चाहिऐन। एहन डेग असमिया आ पूर्वोत्तर केर सभ देसी भाषाक लेल अन्हारक संकेत अछि। सासित्य सभा मांग करैत अछि जे कक्षा दस धरि हिंदी कें अनिवार्य करबाक निर्णय कें रद्द कयल जाय।

नागरिकता संशोधन कानूनक विरोधक क्रम मे गठित  क्षेत्रीय पार्टी असम जातीय परिषद केर अध्यक्ष लुरिन ज्योति गोगोई केंद्र सरकारक एहि प्रस्ताव कें दुर्भाग्यपूर्ण बतौलनि। हुनक कहब छल जे कतेको जनगणना रिपोर्ट मे कहल गेल अछि जे असमिया आ अन्य जातीय ढाषा संकट मे अछि। एहन समय मे हमर भाषा कें विकसित करबाक बदला भाजपा हिंदी कें थोपबाक योजना बना यहल अछि। असल मे ई भाजपाक ओहि दावाक खंडन अछि जे ओ पूर्वोत्तर केर लोकक, ओकर भावनाक आ ओकर संस्कृतिक बेसी परवाह करैत अछि। पूर्वोत्तर केर मूल निवासी सँ मातृभाषा छीनबाक प्रयास कें कहियो स्वीकार नहि कयल जाएत।

मुदा असम प्रदेश भाजपाक वरिष्ठ नेता आ असम वित्तीय निगम केर अध्यक्ष विजय गुप्ता हिंदी-हिंदू-हिंदुस्तान बला बातक उत्तर दैत कहैत छथि – भाषा बहुत संवेदनशील विषय अछि। एकरा ल’ क’ कहियो राजनीति नहि होमक चाही। कोनो भाषाक तुलना कोनो भाषा सँ नहि कयल जाइत अछि। सभ भाषाक अपन महत्व अछि। आ इएह कारण अछि जे हमर सरकार स्थानीय भाषा कें आर बेसी समृद्ध करबाक लेल नीति तैयार कयलक अछि।

मुदा आजुक वातावरण मे हम सभ अपन आवश्यकताक लेल हिंदी सीखि रहल छथि। हिंदी राजभाषा सेहो अछि। सोशल मीडिया सँ ल’ क’ दोसर प्लेटफार्म पर आजुक समय मे लैक अंग्रेजी बेसी बाजि रहल छथि। एहि मे कोनो तरहक कोनो राजनीतिक आवश्यकता नहि अछि। जकरा जे मोन करय, ओ ओही भाषा मे पढाइ करय। ककरो पर हिंदी थोपल नहि जाएत। तें हिंदी-हिंदू-हिंदुस्तान सँ जे लोक एहि बात कें जोड़ि क’ देखि रहल अछि, ओ बिना कारण लोक कें भ्रमित क’ रहल अछि।

असल मे असम सहित पूर्वोत्तर केर कतेको राज्य मे त्रिभाषा सूत्रक पालन.कयल जा रहल अछि। अरुणाचल प्रदेश कें छोड़ि क’ कक्षा आठ धरि एत’ हिंदी अनिवार्य रूप सँ पढ़ाएल जाइत अछि। त्रिपुरा मे हिंदी कोनहु कक्षा मे अनिवार्य नहि अछि। अरुणाचल प्रदेश मे कतेको आदिवासी समूह मे सँ प्रत्येक केर अपन भाषा अछि। तें हिंदी ओत’ संपर्क भाषाक रूप मे उभरल अछि।

राज्यक 26 जनजाती आ 256 उप-जनजाती मुदा विविधताक कारण हिंदी कें ओत’ लोकप्रिय हेबाक प्रमुख कारण मानल जाइत अछि।

ओना तमाम प्रतिक्रिया पर उत्तर दैत असम केर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा स्पष्ट कयलनि जे हिंदी कें अनिवार्य विषय बनेबा लेल अखन धरि केंद्र दिस सँ कोनो निर्देश नहि भेटल अछि। ओ कहलनि जे असम केर मातृभाषा आ शिक्षाक माध्यम असमिया अछि। अमित शाह दसम कक्षा धरि छात्र कें हिंदीक प्रारंभिक ज्ञान हेबाक गप कहने छलाह। ओ कखनो ई नहि कहलनि जे लोक कें अपन मातृभाषा मे शिक्षा छोड़ि देमक चाही। एते धरि जे नव शिक्षा नीति सेहो कम सँ कम ग्रेड पाँच धरि शिक्षाक माध्यम मातृभाषा मे हेबाक बात कहैत अछि। मुख्यमंत्री सरमा जनतब दैत कहलनि जे असम सरकार असम साहित्य सभा आ अन्य आदिवासी साहित्य सभाक संग परामर्श क’ चारि भाषा नीति तैयार क’ लेने अछि। एहि नीतिक अंतर्गत असमिया आ अन्य स्थानीय भाषा कें प्रमुखता भेटत। ओना बोडो साहित्य सभाक किछु आपत्तिक कारण अखन एहि नीति कें लागू नहि कयल गेल अछि। मुख्यमंत्री कहलनि जे एक बेर असम विधानसभा मे अरबी भाषा सीखबाक संबंध मे बहस भेल छल। एहि क्रम मे ओहि पर कोनो विवाद नहि भेल। मुदा अमित शाहक हिंदी भाषा सीखबाक टिप्पणी पर अकारण विवाद भ’ गेल अछि।

(बीबीसी सँ साभार) 

 

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