December 4, 2022

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अर्थव्यवस्था : महगीसँ गाम आ किसान परेशान

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  • मिथिला मेल डेस्क

राष्ट्र निर्माणक नाम पर दिन प्रतिदिन बढ़ि रहल महगी आब असहनीय भेल जा रहल अछि। ओनात’ महगी सभ वर्गकेँ प्रभावित करैत अछि मुदा जिनक कमाइक पैघ भाग खयबा-पीबा पर खर्च भ’ जाइत छनि हुनका पर ई मारि सभसँ बेसी पड़ैत अछि। कारण ई अछि जे खेबा-पीबा बला वस्तुक दाम सभसँ बेसी बढ़ि रहल अछि। एहि संबंधमे सरकारक रवैया गृहमंत्री राजनाथ सिंहक एकटा बयानसँ पता चलैत अछि। रक्षामंत्री पुणेमे भाजपा कार्यकर्ता लोकनिकेँ संबोधित करैत कहलनि जे अमरीका जे सभसँ धनी देश अछि, ओत’ मुद्रास्फीति पिछला 40 वर्षमे अपन चरम पर अछि। तें हमरा सभकेँ अपराध बोधक अनुभव नहि करक चाही। ओना जाहि दिन ओ ई गप्प कहलनि ओही दिन वित्तमंत्री निर्मला सीतारण पेट्रोल आ डीजल पर एक्साइज ड्यूटी मे कटौतीक घोषणा कयलनि। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी आठ टाका आ डीजलपर छह टाका घटाएल गेल अछि। ओना एहि दुनूक दाम पिछला दू मासमे 10-10 टाका बढ़ाएल सेहो गेल छल। एहिसँ पहिने रिजर्व बैंक सेहो कर्ज 0.40 प्रतिशत महगक’ देने छल ताकि महगी पर अंकुश लगाएल जा सकय। ओना ई कहब अखन मोसकिल अछि जे एहि डेगसँ महगी पर कते लगाम लागत।

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सरकारी आंकड़ा पर ध्यान दियौ। अप्रैलमे खुदरा महंगाइ आठ सालमे सभसँ बेसी 7.79 प्रतिशत पर पहुँच गेल। खाद्य महगाइ 8.38 प्रतिशतभ’ गेल। ई मार्चमे 7.68 प्रतिशत छल आ साल भरि पहिने ई मात्र 1.96 प्रतिशत छल। लगभग सभ खाद्य पदार्थक मूल्यमे वृद्धि भेल। पिछला मास थोक महगाइत’ 15.08 प्रतिशत पर पहुँच गेल आ ई लगातार 13 माससँ 10 प्रतिशत बेसी छल। एहि महगीक सभसँ खास बात ई अछि जे ई शहरवासीक तुलना मे ग्रामीण लोकनिकेँ बेसी परेशानक’ रहल छनि। शहरी क्षेत्रमे खुदरा महगाइ दर 7.09 प्रतिशत अछित’ ग्रामीण क्षेत्रमे ई 8.38 प्रतिशतभ’ गेल अछि। किसान भले खाद्य पदार्थक उत्पादन करैत होथि मुदा हुनका लोकनिकेँ खाद्य सामग्री बेसी दामपर कीन’ पड़ैत छनि। गाममे खाद्य मुद्रास्फीति दर 8.50 प्रतिशत आ शहरमे 8.09 प्रतिशत अछि। अप्रैल 2021 मे गाममे खाद्य महगाइ 1.31 प्रतिशत आ शहरमे 3.15 प्रतिशत छल।

किसान लोकनि पर महगीक मारि दू तरफा अछि। किएकत’ हुनक खेतीक लागतत’ बढ़ि गेलनि मुदा उपज केर दाम ओहि अनुपात मे नहि बढ़लनि। बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज केर एकटा रिपोर्ट बतबैत अछि जे भारतमे खेतीक लागत वित्त वर्ष 2020-21 केर तुलनामे 20 प्रतिशत धरि बढ़ि गेल। पिछला पांच सालमे कृषि लागतमे बेसी अंतर आएल अछि। ट्रैक्टरक मूल्य पाँच सालमे 50 प्रतिशत बेसी बढ़ि गेल अछि। डीजल, खाद आ बीयाक दाम आ मजदूरी सेहो खूब बढ़ि गेल अछि मुदा बढ़ल लागत केर अनुरूप फसलक मूल्य नहि बढ़ल अछि। रिपोर्टक अनुसार सामान्य मानसूनक उम्मीद आ खाद्य पदार्थक मूल्यमे तेजीक कारण 2022-23 मे ग्रामीण लोकनिक आय बढ़तनि मुदा कृषि लागत बेसी बढ़लाक कारण एतुका लोकक संकट आर बेसी गंभीरभ’ सकैत अछि।

 

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महगीसँ पस्त किसान

रूस-यूक्रेन लड़ाइ सँ अंतर्राष्ट्रीय बजारमे किसानक आमदनी बढ़बाक उम्मीद छल मुदा ई उम्मीद तहन समाप्तभ’ गेल जहन सरकार देशमे गहूमक उपलब्धताक संकटक बात कहैत निर्यात पर रोक लगा देलक। हरियाणा प्रोग्रेसिव किसान संगठन केर अध्यक्ष साहब सिंह कहलनि जे निर्यातक कारण किसान लोकनिकेँ पहिल बेर गहूमक दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (2015 टाका प्रति क्विंटल) सँ तीन सय टाका बेसी भेटि रहल छल। मुदा निर्यात पर प्रतिबंध लगलाक बाद दाम एमएसपीसँ नीचां आबि गेल अछि। एहि तरहेँ मौसिमक गरमीक कारणें उत्पादनक नोकसान झेलनिहार किसानक लेल राहति केर रस्ता सरकार बंदक’ देलक अछि।

महगीसँ संपूर्ण विश्व परेशान अछि। अमरीका आ यूरोप चारि दशकसँ रिकॉर्ड महगीक सामनाक’ रहल अछि। यूक्रेन-रूस युद्धक कारण खाद्यान्न, खाद्य तेल आ ईंधन केर महगीसँ अखन राहति केर संभावना नहि अछि। किछु दिन पहिने संयुक्त राष्ट्रक महासचिव एंटोनियो गुटेरस सुरक्षा परिषदमे कहने छलाह जे रूस-यूक्रेन युद्धक कारण दुनियाँक 60 प्रतिशत अल्पपोषित लोक प्रभावित भेल छथि। कतेको देशमे पैघ संख्यामे लोक अकाल दिस बढ़ि रहल अछि।

 

शहरसँ होइबला आपूर्तिपर बढ़ल निर्भरता

विश्व मौसम विज्ञान संगठन आ संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा स्थापित इंटरगवर्मेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आइपीसीसी) भविष्यवाणी कयलक अछि जे भारतमे जलवायु परिवर्तनक कारणें खाद्यान्न उत्पादन घटलासँ महगी आर बढ़त। मार्च आ अप्रैलमे भीषण गरमीसँ फसिलक उत्पादन 25 प्रतिशत धरि कम भेल अछि। एहिसँ ग्रामीण क्षेत्रक लोक लेल संकट बढ़ि गेल अछि।

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय बिजनेस स्कूल, लुधियानाक डायरेक्टर डॉ. संदीप कपूरक अनुसार पंजाब आ हरियाणाक अधिकांश गहूम आ धान उत्पादक किसान खाद्य तेल, दालि, फल, तरकारी आ अन्य आवश्यक वस्तुक लेल शहरी आपूर्ति पर निर्भर अछि। इएह हाल अन्य राज्यक ग्रामीणकेँ सेहो छनि जे दू वा तीन फसलक अतिरिक्त डेयरी वा मुर्गी पालनसँ जुड़ल छथि। शहरसँ होइबला आपूर्ति पर हुनक निर्भरता बेसी अछि। मालभाड़ा आ स्थानीय दोकानदारक नाफा मिलाक’ शहरक तुलनामे हुनका लोकनिकेँ शहरक तुलनामे वस्तुजात 10 सँ 15 प्रतिशत बेसी महग कीन’ पड़ैत छनि। गाममे रहैबला 70 प्रतिशत लोककेँ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) सँ चाउर आ गहूम कम दाममे भेटैत छनि जहनकि दालि, खाद्य तेल आ अन्य आवश्यक वस्तु हुनका लोकनिकेँ बाजारसँ कीन’ पड़ैत छनि। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषदमे पंजाबसँ सदस्य रहल पूर्व खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री भारतभूषण आशु कहलनि जे जनवितरण वितरण प्रणाली (पीडीएस) केर अपन सीमा आ अपन कमी छै। एहिसँ जरूरतमंद लोकक सभ आवश्यकताक पूर्ति नहि होइत अछि। आ इएह कारण अछि जे खाद्य सुरक्षा ग्रामीण लोकनिकेँ महगीक मारिसँ नहि बचा पबैत अछि। खाद्य तेल आ दालि हुनक पहुँचसँ बाहर भ’ जाइत अछि।

भारतीय किसान यूनियन उगरांह केर महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां शासन व्यवस्थासँ सेहो बिगड़ल छथि। ओ कहैत छथि जे घरेलू गैस सिलिंडरक दाम 1000 टाकाक पारभ’ गेल अछि। दू मास पहिने पंजाबमे चुनावक क्रममे कतेको दल सालमे आठ सिलिंडर मुफ्त देबाक घोषणा कयने छल मुदा 70 प्रतिशत लोक बढ़ैत महगीक मोकाबला कोना करय, एकर कोनो स्थायी समाधान हुनका सभ लग नहि छनि। आवश्यक वस्तुक आपूर्ति आ मूल्यक निगरानी करबा लेल कोनो ठोस तंत्र नहि अछि।

 

पीडीएसमे सरीक नहि भेल घरेलू गैस सिलिंडर

महगीसँ निपटबाक प्रयासमे गंभीरता अनबाक आवश्यकता पर जोर दैत ग्रामीण अर्थव्यवस्था विशेषज्ञ एवं पंजाब योजना बोर्डक पूर्व अध्यक्ष अमृत सागर मित्तल कहैत छथि जे गहूमक निर्यात पर प्रतिबंध लगेबाक फैसलासँ महगीकेँ कम करबामे कोनो खास सहयोग नहि भेटत, किएकत’ अधिकांश खाद्य पदार्थक दाम 25 प्रतिशत धरि बढ़ि गेल अछि। पीडीएस केर दायरामे अबैबला 80 करोड़ लोककेँ महगीसँ राहति देबाक लेल राशन व्यवस्थाक मुद्रास्फीति संग तालमेल बैसेबाक आवश्यकता अछि। किरासन मुक्त अभियान अंतर्गत चंडीगढ़ सहित देशक कतेको क्षेत्रक गरीबी रेखासँ नीचांक लोककेँ सस्ता ईंधनसँ वंचितक’ देल गेल अछि मुदा एकर स्थान पीडीएसमे रियाायती घरेलू गैस सिलिंडरकेँ सरीक नहि कयल गेल अछि।

कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर महगीक दबाबकेँ कम करबाक लेल खाद्य सुरक्षा अधिनियम अंतर्गत खाद्य तेल, दालि आ अन्य आवश्यक पदार्थकेँ सरीक करबाक दलील देल जा रहल अछि। कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर शोधक’ रहल पंजाब कृषि विश्वविद्यालयक छात्र निर्मल सिंह कहैत छथि जे मांग आ आपूर्तिक बीच अंतरकेँ कम करबाक लेल ‘क्लाइमेट स्मार्ट’ फसिलकेँ प्रोत्साहित करबाक आवश्यकता अछि। महगी पर काबू पेबा लेल आवश्यक खाद्य पदार्थक निगरानीक लेल पारदर्शी तंत्र बनेबाक आवश्यकता अछि।

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