December 4, 2022

Mithila Mail

मिथिलाक न्यूज मैथिली मे

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जल्दिए किसानकेँ नीलगायक आतंकसँ भेटि सकैत छनि राहति

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  • नीलगायकेँ पालतू बनेबाक लेल बक्सरक डुमरांव मे खूजि रहल अछि नीलगाय शोध केंद्र
  •  बकरी आ हरिणक प्रजातिक होइत अछि नीलगाय, एकर दूध आ मांस भ’ सकैत अछि उपयोगी
  •  वर्तमानमे नीलगायक आतंकसँ परेशान रहैत छथि किसान

 

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पटना :  मिथिलाक किसान बाढ़ि आ सुखाड़सँ परेशान त’ रहिते छथि, संगहि नीलगायक आतंकसँ सेहो परेशान रहैत छथि। मिथिला सहित संपूर्ण बिहारमे लाखोक संख्यामे नीलगाय अछि जे फसलकेँ भारी नोकसान पहुँचाबैत अछि। घोड़ा जकाँ देखबामे अबै बला ई एकटा एहन जानवर अछि जे घनगर जंगलमे नहि रहि क’ झाड़ीमे रहब बेसी पसंद करैत अछि। नीलगायक नाममे गाय अवश्य जुड़ल अछि मुदा एकर कोनो संबंध गोवंशसँ नहि अछि। कहल जाइत अछि जे ई एशियाइ मृग कुलक भारी-भरकम पशु अछि जे झुंडमे रहैत अछि। नीलगाय दिन वा राति कखनहुँ फसलकेँ चरि जाइत अछि। कोरोना कालमे नीलगायक आतंक सँ सीतामढ़ी आ सुपौल जिला सर्वाधिक प्रभावित रहल। एकटा आकलनक अनुसार सीतामढ़ीमे दू वर्षमे लगभग पाँच सय बीघामे लागल फसिल कें क्षति पहुँचौलक जहनकि अही दू वर्षमे सुपौल जिलामे सेहो लगभग साढ़ चारि सय बीघामे लागल फसिलकेँ नोकसान पहुँचौलक। दरभंगा, सहरसा, समस्तीपुर, मधुबनी आदि जिलासँ सेहो नीलगाय द्वारा फसिलकेँ नोकसान पहुँचेबाक समाचार अबैत रहल। प्रतिवर्ष नीलगाय लाखो टाकाक फसिलकेँ नोकसान पहुंचाबैत अछि।

मुदा आब किसानकेँ नीलगायक आतंकसँ मुक्ति दियेबाक लेल पहल शुरू क’ देल गेल अछि। बक्सरक हरियाणा फार्ममे नीलगायकेँ पालतू बनेबाक योजनापर काज चलि रहल अछि। एकरा लेल हरियाणा फार्ममे वीर कुंवर सिंह कृषि कॉलेजक जमीनपर नीलगायकेँ पालतू बनेबा लेल अनुसंधान केंद्र खोलल जाएत। अनुसंधान केंद्र खोलबाक स्वीकृति भेटि गेल अछि। कहल जाइत अछि जे बिहार देशक एहन पहिल राज्य हैत जत’ नीलगायकेँ पालतू बनेबाक लेल शोध कयल जाएत। संभवत: एहि मासक अंत धरि एहि ठाम नीलगाय शोधकेंद्र शुरू भ’ जाएत।

 

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डॉ सुदय प्रसादकेँ सौंपल गेल जिम्मेवारी 

एहि शोध केंद्रक जिम्मेवारी जीव-जंतु वैज्ञानिक डॉ. सुदय प्रसादकें सौंपल गेल अछि। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (भागलपुर) केर कुलपति डॉ. अरुण कुमार वर्तमानमे एहि शोध केंद्रक लेल तीन लाख टाकाक राशि आवंटित कयलनि अछि। एहि संबंधमे भोला शास्त्री कृषि कॉलेज, पूर्णियामे पदस्थापित जीव-जंतु वैज्ञानिक डॉ. सुदय प्रसाद बतौलनि जे नीलगायमे गाय शब्द अवश्य लागल अछि मुदा ई पशु बकरी आ हिरन प्रजातिक अछि। एकर बहुत रास लक्षण बकरी आ हिरणसँ मिलैत अछि।

 

बकरी आ हिरण जकाँ होइत अछि एकर विशेषता

बकरी आ हिरण जकाँ नीलगायक सेहो दूटा थन होइत अछि। बकरी आ हिरण सामान्य रूपसँ तीन बच्चाकेँ जन्म दैत अछि। नीलगाय सेहो सामान्य रूपसँ तीन बच्चाकेँ जन्म दैत अछि। नीलगायक मल सेहो बकरी आ हिरण जकाँ भेरारी जकाँ होइत अछि। जीव-जंतु वैज्ञानिक डॉ सुदय प्रसाद कहैत छथि जे 31 जिला नीलगायक आतंकसँ प्रभावित अछि। नीलगायकेँ मारि देब समस्याक समाधान नहि भ’ सकैत अछि। एहिसँ पर्यावरण असंतुलित भ’ सकैत अछि।

 

दूध आ मांसमे भेटि सकैत अछि आवश्यक तत्व

डॉ सुदय कहैत छथि जे नीलगायक दूध आ मांसमे कतेको आवश्यक तथ्य नुकाएल भ’ सकैत अछि। एकरा पालतू जानवर बना क’ रोजगार आ अर्थोपार्जन कयल जा सकैत अछि। कहल जाइत अछि जे बक्सर स्थित डुमरांवमे सर्वाधिक नीलगाय पाओल जाइत अछि तेँ वीर कुंवर सिंह कृषि कॉलेजक प्रांगणमे ‘नीलगाय शोध केंद्र’क स्थापना कयल जा रहल अछि। डॉ. सुदय कहैत छथि जे ई शोध सफल हैत आ बिहारक किसानकेँ ने सिरिफ नीलगायक आतंकसँ मुक्ति भेटतनि अपितु बेरोजगार लोकक लेल ई रोजगार सृजन सेहो करत। वर्तमानमे नीलगाय किसानक लेल एकटा पैघ समस्या बनल अछि।

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